टोयोटा ने हाईब्रिड और इलैक्ट्रिक वाहनों के पुर्ज़ों के घरेलू उत्पादन का प्लान बना रही है

Medhaj News 23 Jul 20 , 17:27:40 Science & Technology Viewed : 1096 Times
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अब भी हाईब्रिड और इलैक्ट्रिक वाहन कीमत के हिसाब से ज़्यादा हैं किफायती नहीं हैं, यही वजह है कि भारत में हाईब्रिड वाहन भी उतने लोकप्रिय नहीं हो सके हैं। टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन लंबे समय से इलैक्ट्रिक वाहनों पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है। कंपनी ने 2017 में मारुति सुज़ुकी और डेन्सो के साथ साझेदारी की थी और गुजरात में बैटरी प्लांट बनाने का फैसला किया था। लेकिन अब भी हाईब्रिड और इलैक्ट्रिक वाहन कीमत के हिसाब से ज़्यादा हैं किफायती नहीं हैं, यही वजह है कि भारत में हाईब्रिड वाहन भी उतने लोकप्रिय नहीं हो सके हैं जितनी उम्मीद की जा रही थी। हालांकि कार निर्माता आगे बढ़ते हुए संभवतः अपने पोर्टफोलियो में कई इलैक्ट्रिक वाहन शामिल करने वाले हैं जिससे इंधन की खपत कम हो सके और कैफे (कॉर्पोरेट ऐवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) नियमों के हिसाब से पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के इंधन वाले वाहनों को नियंत्रण में लाया जा सके।

अगले सिर्फ दो वर्षों में भारतीय सड़कों पर आपको बहुत सारे हाईब्रिड वाहन दिखाई देने लगेंगे इलैक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को किफायती बनाया जा सकता है, अगर इसमें लगने वाले पुर्ज़ों का इस्तेमाल घरेलू स्तर पर किया जाए और टोयोटा इसी काम के लिए आगे बढ़ रही है। फ्रीव्हीलिंग विद एसवीपी के हालिया वेबिसोड में टोयोटा किरलोसकर मोटर की सेल्स और सर्विस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नवीन सोनी ने बताया कि, "हाईब्रिड और इलैक्ट्रिक वाहनों में तीन सबसे मुख्य बाते होती हैं जिसमें बैटरी, इलैक्ट्रिक और कंट्रोलर शामिल हैं। हमने सरकार से भी यही कहा है कि अगर हम इन तीनों का उत्पादन घरेलू स्तर पर करते हैं तो हाईब्रिड और इलैक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम किया जा सकता है।" हाईब्रिड वाहनों के भविश्य को लेकर पूछे गए सवाल पर सोनी ने कहा कि, अगले सिर्फ दो वर्षों में भारतीय सड़कों पर आपको बहुत सारे हाईब्रिड वाहन दिखाई देने लगेंगे।

हालिया समय में निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती वाहनों को बीएस6 मानकों में ढ़ालना थी जिसके लिए पूरी इंडस्ट्री ने भारी मात्रा में निवेश किया है। इसमें खासतौर पर डीजल इंजन को बीएस6 मानकों के हिसाब से बनाना शामिल रहा। इसमें डीजल पार्टिक्युलेट फिल्टर की आवश्यक्ता होती है और इंधन को नियंत्रित करने के लिए सल्फेट केटेलिस्ट रिडक्शन सिस्टम ज़रूरी होता है। ये दोनों इंजन के आकार के हिसाब से कार की कीमत में 25 प्रतिशत तक इज़ाफा कर देते हैं। सोनी ने बताया कि फिलहाल निर्माता बिना मार्जिन कमाए काम कर रहे हैं जिससे बीएस6 वाहनों को किफायती दामों पर बेचा जा सके। ऐसे में जल्द ही वाहनों की कीमतों में इज़ाफा किया जाने वाला है, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।


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